ग़ज़ल/नज़्म

The current query has no posts. Please make sure you have published items matching your query.

कविताएँ

मेरी चाहत

मेरी सदियों पुरानी अधूरी चाहतें
जिसे मैंने हमेशा
उसके अधूरे पन के साथ ही जिया
न जाने क्यों पूरा होने को मचलने लगी है
उसे लगने लगा है कि
उनका सदियों पुराना अधूरापन
खत्म होने को है
उसे सपनों के पंख लग गए हैं
और वह अपनी मंजिल को उड़ चली है
मैं एक तरफ खड़ा
आँखें मलते हुए
सोच रहा हूँ
कि यह मेरा भ्रम है
या चाहत की हकीकत
मैंने कई बार चाहत को समझाना चाहा
कि वह अपनी चाहत को

पूरा करने की चाहत में
कस्तूरी तो नहीं ढूंढ रही
लेकिन वह मुझे ही
समझाना चाहती है
नींद से जगाना चाहती है
मेरे साथ
हंसना और गुनगुनाना चाहती है
मुझे अधूरे से पूरा बनाना चाहती है
और वह अपनी मंजिल की छांव में
अपने आने वाले
सब लम्हे बिताना चाहती है

 

वह चाहती है कि
वह अपनी मंजिल का हाथ थामे
मंदिर में अपने प्यार का दिया जलाए
रब से अपनी और अपनी मंजिल की
कभी ना बिछड़ने की दुआ मांगे
और जब रब खुश हो जाए
तो उसकी रहमत की चादर से खुद को
और अपनी चाहत को ढ़ाप ले

 

वह चाहती है कि
वह अपनी मंजिल का हाथ थामे
खुले आसमान के नीचे
दूर तक दौड़ लगाए
महकती खुशनुमा हवाओं को
अपने सीने में उतार ले
वो दौड़ती रहे, दौड़ती रहे

दौड़ते-दौड़ते कभी अपनी मंजिल को देखे
कभी आसमां में बैठे रब से बातें करें
और जब थक जाए
तो अपनी मंजिल की गोद में
सर रख के
मीठी नींद सो जाए

 

वह चाहती है कि
वह अपनी मंजिल का हाथ थामे
पर्वतों की चोटियों से
दुनिया की ओर मुंह करके
अपनी मंजिल को सीने से लगाए
ऐलान करे की
ऐ दुनिया वालों
देखो हमारे प्यार को
हम ओम हैं
हमें अल्लाह ताला का आशीर्वाद प्राप्त है
यह जन्म तो क्या
आने वाले तमाम जन्मों का
हमारा अटूट साथ है

 

वह चाहती है की
वह अपनी मंजिल का हाथ थामे
समुद्र की लहरों के साथ
अठखेलियाँ करें

समुंदरों के किनारे किनारे,
घुटनों तक पानी में
अपनी मंजिल के साथ
लंबी दौड़ लगाए
दौड़ते-दौड़ते
कभी अपनी मंजिल को चूमे
कभी उसे बाहों में भर ले
कभी उसे अपने सीने से लगाए
कभी उसके अधरों पर
अपने अधर रखकर
अपने सीने में उफनता समुंदर
उसके सीने की
अथाह गहराइयों में उड़ेल दे

 

वह चाहती है कि
वह अपनी मंजिल का हाथ थामे
दूर आसमानों के पार जाए
झिलमिलाते सितारों को छू ले
आसमां के पार जहाँ जितने भी हैं
सब अपनी बाहों में भर ले
और उसकी मंजिल जहां जहां से गुजरे
वहां के लोगों के दिलो में
मीठा प्यार बन बस जाए
और वहां के लोग
सिर्फ प्यार के गीत गाए

 

वह चाहती है कि
वह अपनी मंजिल का हाथ थामे
दूर रेगिस्तान का सफर तय करे

जहां जहां उसका कारवां गुजरे
बाहर रेगिस्तान में फूल खिल उठे
जहां जहां भी उसकी मंजिल मुस्कुराए
वहां मीठे पानी के झरने बहने लगे
जहां-जहां भी वह
अपनी मंजिल को प्यार करे
वहां रेत के कण कण में
प्यार समा जाए

 

वह चाहती है कि!
वह चाहती है कि!
चाहत की चाहते तो असीम है
उन्हें कहाँ तक औराक पर उतारूं
लेकिन चाहत की चाहतें
सिर्फ मंजिल के साथ हैं
उसकी प्यारी मंजिल
जो उसे बहुत बहुत बहुत प्यार करती है
प्यार का इजहार करती है
आखिरी लम्हें तक साथ निभाना चाहती है
चाहत के साथ ही मुस्कुराना चाहती है
अब चाहत की ज़िन्दगी मंजिल का प्यार है
क्यूँकि चाहत की जान
मंजिल में बस चुकी है
अब चाहत मंजिल बन चुकी है…

K011




ग़ज़ल/ नज़्म




दोहे




कोट्स

Subscription

Get Updated For Latest Poetry
Registration Form

Kavita

बेटी की पुकार- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

क्यूँ हिला देते हो
मेरी अंतरात्मा को झिंझोड़कर

आत्मसाक्षात्कार

यह तो विदित है
कि मैं किशोरी नहीं

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी तू क्यूँ रेत बन गयी

मैं जब-जब तुझे

Ghazal/Nazm

अश्क़ बहते नहीं अब

अश्क़ बहते नहीं अब  तेरी बेवफाई में
हम खुश रहते हैं उस रब की रज़ाई में

जब कभी तेरी याद

जब कभी तेरी याद आती है,
रात आँखों  में गुज़र जाती है

अश्क बहते हैं

अश्क बहते हैं सारी रात कि तुम आ जाओ
आँसुंओं  की है  बरसात  कि तुम आ जाओ

Punjabi

रोटी

इस रोटी दी दास्तां नू मैं की दस्सा

रब ने सब  बंदेया  लई बनाई रोटी

तेनु देखे बिना

तेनु देखे बिना दिल नहींयो लगदा

जिया  मेरा  हलक  च  फसदा

जो होंदा है होण देओ

जो होंदा  है  होण देओ

सांनू ता बस सोण देओ

Image Shayari

Recent/Popular

अश्क़ बहते नहीं अब

अश्क़ बहते नहीं अब  तेरी बेवफाई में
हम खुश रहते हैं उस रब की रज़ाई में

जब कभी तेरी याद

जब कभी तेरी याद आती है,
रात आँखों  में गुज़र जाती है

अश्क बहते हैं

अश्क बहते हैं सारी रात कि तुम आ जाओ
आँसुंओं  की है  बरसात  कि तुम आ जाओ

G001 zindagi aram ka samaan

ज़िन्दगी आराम का सामान बन के रह गई
आरज़ू इक घर की थी मकान बन के रह गई

G003 sehera mai miraz dikhaker

सहरा में मिराज दिखाकर मुझे भटकाने वाले

तुम्हीं तो थे मेरे रहबर मुझे राह दिखाने वाले

G045 kisi ka pyaar

रूठा है यार मेरा उसे मनाऊं कैसे

करते है इंतहा प्यार बताऊँ कैसे

G046 aaj kyun na kuch

आज क्यूँ न कुछ यू किया जाए

तेरी यादों के साये तले सोया जाए

G004 ye bhi kya baat hui

ये भी क्या बात हुई कि वो बात नहीं करते

पहले जैसी अब वो मुलाक़ात नहीं करते

G009 Ye jo zindagi

यें जो जिंदगी की किताब है
ये किताब वाकई लाजवाब है

G002 har admi akela

हर आदमी अकेला परेशान बहुत है

इस शहर में दोस्त कम अंजान बहुत हैं

G054 kisi ka pyaar

किसी का प्यार उसको मिल गया होगा

भरी धूप में बरसात का ये ही सबब होगा

G060 kuch kuvaab adhure

कुछ ख़्वाब अधूरे है पूरे कर दो ना

कुछ ज़ख़्म गहरे है मरहम कर दो ना

G063 Tu mera ho nahi sakta

तू मेरा हो नहीं सकता, जानता हूँ मगर

फिर भी दिल लगाने को जी चाहता है।

G016 Dur se puchogaye haal

दूर से पूछोगे हाल तो अच्छा ही बताएँगे

आओगे पास थोड़ा तो दिल खोल के दिखाएँगे

G024 Ikhtilat Kijiye

इख़्तिलात किजिए या अदावत किजिए

कुछ तो किजिए चाहे ख़िलाफ़त किजिए

G042 Aaj ka din

आज का दिन फिर कहानी हो गया

आना उनका मेहरबानी हो गया

G055 tune mujhe ek baar

तूने मुझे एक बार तो आज़माया होता,
तेरी आँखों में मेरा प्यार तो आया होता।

G057 Aaj bas itni inaayat

आज बस इतनी इनायत कीजिये

रुख से पर्दा हटाने दीजिये

G044 Tum saath ho

तुम साथ हो तो लगता है बूँद भी बरसात है

सुबह सुहानी, शाम मस्तानी मदहोश हर रात है

G051 Neend se jago

नींद से जागो तो कुछ ख्व़ाब दिखाएं

देखो आसमाँ संग तो महताब दिखाएं

G043 Tum khud ko meri

तुम ख़ुद को मेरी निगाहों से देखो

तुम्हें ख़ुद से ही प्यार हो जाएगा

G041 shaam aye safar

शाम-ए-सफर में गर हमनशी का साया भी हो

ज़िन्दगी यूं ही सफ़र में गुज़ार दूं मैं

G040 Tum mujhe jeene ki

तुम मुझे जीने की इक वजह दे दो

मैं ये जिंदगी तुम पे लुटा दूंगा

G039 Tu na chahe mujhe

तू ना चाहे मुझे तो क्या ग़म है

तू है मेरी यादों में ये क्या कम है

G023 Mohobat mai jab

मुहब्बत में जब रब की इनायत हो जाती है

जो भी वो बोलें वही रुबायत हो जाती है

G036 Hale dil

हाले दिल कुछ उन्हें यूँ सुनाया गया

अपने दिल को किताब बनाया गया

G021 Harr chaman mai

हर चमन में इश्क़-ए-गुल कहाँ खिलता है

जहाँ उम्मीद हो इसकी कहाँ मिलता है

G025 Vo na dekhte

वो न देखते, न मुस्कुराते, न बात करते हैं
मोहब्बत हमसे करते हैं, अजी क्या बात करते हैं

G027 Kon keheta hai

कौन कहता है की वो प्यार नहीं करते

प्यार तो करते हैं इज़हार नहीं करते

G026 Jab kabhi tera naam

जब कभी तेरा नाम लेता हूँ

अश्क़ आँखों में थाम लेता हूँ

G032 usne rakha hai

उसने रखा है जाम फूलों पर

आज गुजरेंगी शाम फूलों पर

G034 suraj chand sitare

सूरज चाँद सितारे तुम्हारे हो जाएंगे

जिस दिन आप हमारे हो जाएंगे

G037 Tumhe hamse pyaar

तुम्हें हमसे प्यार हो न हो हमें तो है

तुम्हें इन्तज़ार हो न हो हमें तो है

G022 Aaj fir hamse

आज फिर हमसे परदादारी है

इतना ज़ुल्म क़्या ख़ता हमारी है

G019 Tere kadmo mai

तेरे क़दमों में मेरा सर होगा

कहाँ ऐसा मेरा मुक़द्दर होगा

G041 Shaam aye safar

चाँद से सूरज से जिससे भी यारी रखिए

बस इस दिल में थोड़ी जगह हमारी रखिए

G018 Hamne ek Shaam

हमने इक शाम सुर्ख फूलों से सजायी है

और तुमने ना आने की कसम खायी है

G041 Shaam aye safar

शाम-ए-सफर में गर हमनशी का साया भी हो
ज़िन्दगी यूं ही सफ़र में गुज़ार दूं मैं

K041 Oh meri maa
ओह मेरी माँ

ओह मेरी माँ,
तू चली गई है कहाँ,
छोड़ गई क्यों अकेला,
इस जलते जहाँ।

G031 Dil mai tere

दिल में तेरे बता क्या है
हमसे हुई खता क्या है

G001 Zindagi aram ka samaan

ज़िन्दगी आराम का सामान बन के रह गयी

आरज़ू इक घर की थी मकान बन के रह गयी

G008 Bahut hai duniya mai

बहुत है दुनियां मे लोग, दर्द बढ़ाने वाले
हमसे कहां मिलेंगे, मरहम लगाने वाले

G017 Kuch gum nahi

कुछ गम नहीं जो मौत, गले लगा ले
गर इक घड़ी भी तू मुझें,अपना बना ले

G006 Bekhayali mai barha

बेख्याली में बरहा वो ये भूल जाते हैं
नशेमन हो शबाब तो रिंदे लूट जाते है

G015 Na zafa mai tadpe

ना ज़फा में तड़पे ना वफ़ा में मुस्कुराए

ऐसी भी ज़िन्दगी क्या ज़िन्दगी कहलाए

G007 Kyun tum mujhmai

क्यों तुम मुझ में अपना, ख़ुदा ढूढ़ते हो
आप भी न जाने ये, क्या ढूढ़ते हो

G005 Jiska gum hai

जिसका गम हैं बस वही जाने
दूसरा और कोई क्या जाने

previous arrow
next arrow