तुम साथ हो तो लगता है बूँद भी बरसात है
सुबह सुहानी, शाम मस्तानी मदहोश हर रात है
कल-तक तो ज़िन्दगी का हर लम्हा था भारी
अब तो ये ज़िन्दगी आप ही की सौगात है
इस सूने दिल में कभी इक सहरा था बस्ता
अब तो जिधर देखिये उमड़ते जज़्बात है
कशिश तो कशिश है, दोनों तरफ उठेगी
गर ये मोहब्बत नहीं है तो और क्या बात है
विरह के रात-दिन कभी काटे नहीं कटते थे
अब तो हर रात हमारी इक सुहागरात है
दूरियों के दर्द का सैलाब गुज़र गया
अब हम दो जिस्म ‘राजा’ इक जात है
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