तू ना चाहे मुझे तो क्या ग़म है
तू है मेरी यादों में ये क्या कम है
तुझे याद कर तन्हाईयों में
क्यू मेरी भीगी आँखें फिर नम हैं
तू क्यों मेरे ख़यालों से नहीं जाती
मैं जिधर भी जाऊँ तू मेरे संग है
तू साथ है तो साँस चलती है
तू दूर है तो निकलता दम है
तेरे बिना ये कायनात अधूरी
तू है मेरी ज़िंदगी, तू ही हमदम है
‘राजा’ कहे इश्क़ की दास्ताँ
इश्क़ का मुझ पे बडा करम है
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