चाँद से सूरज से जिससे भी यारी रखिए
बस इस दिल में थोड़ी जगह हमारी रखिए
जानते हैं हम कि गुल किन किताबों में हैं
आप तो बस अपनी तफ़्तीश जारी रखिए
मुफ़लिसी में जेबें भी फट जाया करती हैं
आप इनमें कभी थोड़ी रेज़गारी तो रखिए
समझा नहीं सकते हमें अपनी दलीलों से
आप तो बस अपनी तक़रीर जारी रखिए
आईने के सामने हमसे ही करोगे बातें
इन सुरमई आँखों में तस्वीर हमारी रखिए
बेख़ुदी में क्या मज़ा है तुम जान जाओगे
आप अपने दिल में थोड़ी बेक़रारी रखिए
ख़ुशबू साँसों में होगी, महक फ़िज़ाओं में
आप अपने दिल में धड़कन हमारी रखिए
सब शिकवे भुला कर तुम्हें गले लगा लेंगे
इस ईद आप अपने घर इफ़्तारी रखिए
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