आज बस इतनी इनायत कीजिये
रुख से पर्दा हटाने दीजिये
बादलों अपने पहरे हटालो
चाँदनी ज़मी पे आने दीजिये
मुद्दतो बाद मिले हो हमको
आँसू छलक जाने दीजिये
हम भी अजनबी नहीं रहेंगे
थोड़ा पास तो आने दीजिये
कलियाँ फूल बन खिल उठेंगी
भंवरे गुनगुनाने दीजिये
बेख़्याली में भी मुस्कराओगे
थोड़ा सरूर तो आने दीजिये
बेकरारी से हमको ही ढूंढोगे
बस इक शाँम साथ बिताने दीजिये
राजा आपका मुरीद होगा
सर कदमों में झुकाने दीजिये
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