यक़ीं आता नहीं अब तेरी बेगुनाही में
बहुत धोखे खाए हैं हमने आशनाई में
हर गुनाह तुम्हारा मैं अपने नाम ले लूं
यही तो कहते रहे तुम मेरी रिहाई में
काटता हूँ सज़ा मैं तेरे हर गुनाह की
होता नहीं दर्द तुझे मेरी बेगुनाही में
क़त्ल करके तुम साफ़ बच निकलते हो
मिटा देते हो सब सबूत बड़ी सफाई में
चाहे कुबेर बना लो बेगुनाहों के ख़ून से
कभी बरकत होती नहीं ऐसी कमाई में
इतने गुनाह करके भी मासूम दिखते हो
कैसे जी लेते हो तुम इतनी बेहयाई में
मिलता है सिला सबको हर किए कर्म का
ताक़त बहुत है ‘राजा’ रब की ख़ुदाई में
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