Posted inGhazal/Nazm इख़्तिलात कीजिए Posted by Bhuppi Raja February 2, 2001No Comments इख़्तिलात कीजिए इख़्तिलात किजिए या अदावत किजिएकुछ तो किजिए चाहे ख़िलाफ़त किजिए समझेंगे तुझको भी हम दोस्त अपनाकभी हमसे भी तो शिकायत किजिए अपने लहू को हम स्याही बना लेंगेकभी हमारे सामने आकर बगावत किजिए हम भी किसी के ग़ुलाम नहीं हैं जनाबकभी हमारी भी तो वज़ाहत किजिए इबादत, हिदायत, मोहब्बत का रिश्ता हैकभी जमाअत में भी तो इशारत किजिए समझेंगे हम तुझको अपना अली-वली कभी नज़रों ‘राजा’ पे भी इनायत किजिएG024 Post navigation Previous Post दूर से पूछोगे हालNext Postआज का दिन