दिल को पत्थर भी कर लूँ तो भी क्या हो जायेगा
तेरी यादों का क्या सिलसिला रुक जायेगा
शमा जलते ही तेरे साये को रोज आना
और मुझमे समा जाना क्या कभी ये भूल पाएगा
मोहब्बतका सरूर जो तुम्हारी आँखों में खुमार था
गर वही ना रहा तो और क्या रह जाएगा
कोशिशें लाख करो तुम मुस्कुराने की
गर हम न रहे तो आँसू छलक ही जाएगा
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