आज का दिन फिर कहानी हो गया
आना उनका मेहरबानी हो गया
वो आए पर ना बैठे, ना कोई बात की
दर्द-ए-दिल पूरा रवानी हो गया
सुनानी थी उन्हे दिल कि दास्तां
दिल बेचारा बेजुबानी हो गया
यूं पराया बनके भी कोई आता है
मेरा वक़्त सारा मेजबानी हो गया
अफ़साना बन के रह गया है प्यार मेरा
रिश्ता हमारा किस्से-कहानी हो गया
आँखों में बसा लो मुझे काजल बना
मेरा जिस्म सारा सुर्मे-दानी हो गया
ख़ुद को समझे हैं वो अली-वली
ये यार मेरा बद्गुमानी हो गया
दिल क्यों मेरा इक जगह टिकता नहीं
ये भी तुम सा आना-जानी हो गया
दिल बेचारा अब मेरे बस में नहीं
दिल का मारा ‘राजा’ जानी हो गया
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