कुछ ख़्वाब अधूरे है पूरे कर दो ना
कुछ ज़ख़्म गहरे है मरहम कर दो ना
बहारे रूठ गयी, वीरानी का आलम है
बादल बन चाहत की बारीश कर दो ना
अंधेरे हैं हर तरफ सितारे उदास हैं
चांदनी बन दिलों को रौशन कर दो ना
उदास उतरे चेहरे बे-सहारा भटक रहे
दर अपना देकर उनको इक घर दो ना
जिंदगी सफ़र का अब तन्हा नहीं करता
इन जुल्फ़ो की छाँव में छोटा सा घर दो ना
वीरान सूनी आँखों और ना उम्मीदें हैं
मीठे प्यारे सपने इन में भर दो ना
सुलग रहे हैं अरमा कब से याद नहीं
अपने नाजुक होठ इन पे रख दो ना
जिन चेहरो पे तुमको नफरत नज़र आए
उन चेहरों को ‘राजा’ प्यार से भर दो ना
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