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    G001 zindagi aram ka samaan

    ज़िन्दगी आराम का सामान बन के रह गई
    आरज़ू इक घर की थी मकान बन के रह गई

    G003 sehera mai miraz dikhaker

    सहरा में मिराज दिखाकर मुझे भटकाने वाले

    तुम्हीं तो थे मेरे रहबर मुझे राह दिखाने वाले

    G045 kisi ka pyaar

    रूठा है यार मेरा उसे मनाऊं कैसे

    करते है इंतहा प्यार बताऊँ कैसे

    G046 aaj kyun na kuch

    आज क्यूँ न कुछ यू किया जाए

    तेरी यादों के साये तले सोया जाए

    G004 ye bhi kya baat hui

    ये भी क्या बात हुई कि वो बात नहीं करते

    पहले जैसी अब वो मुलाक़ात नहीं करते

    G009 Ye jo zindagi

    यें जो जिंदगी की किताब है
    ये किताब वाकई लाजवाब है

    G002 har admi akela

    हर आदमी अकेला परेशान बहुत है

    इस शहर में दोस्त कम अंजान बहुत हैं

    G054 kisi ka pyaar

    किसी का प्यार उसको मिल गया होगा

    भरी धूप में बरसात का ये ही सबब होगा

    G060 kuch kuvaab adhure

    कुछ ख़्वाब अधूरे है पूरे कर दो ना

    कुछ ज़ख़्म गहरे है मरहम कर दो ना

    G063 Tu mera ho nahi sakta

    तू मेरा हो नहीं सकता, जानता हूँ मगर

    फिर भी दिल लगाने को जी चाहता है।

    G016 Dur se puchogaye haal

    दूर से पूछोगे हाल तो अच्छा ही बताएँगे

    आओगे पास थोड़ा तो दिल खोल के दिखाएँगे

    G024 Ikhtilat Kijiye

    इख़्तिलात किजिए या अदावत किजिए

    कुछ तो किजिए चाहे ख़िलाफ़त किजिए

    G042 Aaj ka din

    आज का दिन फिर कहानी हो गया

    आना उनका मेहरबानी हो गया

    G055 tune mujhe ek baar

    तूने मुझे एक बार तो आज़माया होता,
    तेरी आँखों में मेरा प्यार तो आया होता।

    G057 Aaj bas itni inaayat

    आज बस इतनी इनायत कीजिये

    रुख से पर्दा हटाने दीजिये

    G044 Tum saath ho

    तुम साथ हो तो लगता है बूँद भी बरसात है

    सुबह सुहानी, शाम मस्तानी मदहोश हर रात है

    G051 Neend se jago

    नींद से जागो तो कुछ ख्व़ाब दिखाएं

    देखो आसमाँ संग तो महताब दिखाएं

    G043 Tum khud ko meri

    तुम ख़ुद को मेरी निगाहों से देखो

    तुम्हें ख़ुद से ही प्यार हो जाएगा

    G041 shaam aye safar

    शाम-ए-सफर में गर हमनशी का साया भी हो

    ज़िन्दगी यूं ही सफ़र में गुज़ार दूं मैं

    G040 Tum mujhe jeene ki

    तुम मुझे जीने की इक वजह दे दो

    मैं ये जिंदगी तुम पे लुटा दूंगा

    G039 Tu na chahe mujhe

    तू ना चाहे मुझे तो क्या ग़म है

    तू है मेरी यादों में ये क्या कम है

    G023 Mohobat mai jab

    मुहब्बत में जब रब की इनायत हो जाती है

    जो भी वो बोलें वही रुबायत हो जाती है

    G036 Hale dil

    हाले दिल कुछ उन्हें यूँ सुनाया गया

    अपने दिल को किताब बनाया गया

    G021 Harr chaman mai

    हर चमन में इश्क़-ए-गुल कहाँ खिलता है

    जहाँ उम्मीद हो इसकी कहाँ मिलता है

    G025 Vo na dekhte

    वो न देखते, न मुस्कुराते, न बात करते हैं
    मोहब्बत हमसे करते हैं, अजी क्या बात करते हैं

    G027 Kon keheta hai

    कौन कहता है की वो प्यार नहीं करते

    प्यार तो करते हैं इज़हार नहीं करते

    G026 Jab kabhi tera naam

    जब कभी तेरा नाम लेता हूँ

    अश्क़ आँखों में थाम लेता हूँ

    G032 usne rakha hai

    उसने रखा है जाम फूलों पर

    आज गुजरेंगी शाम फूलों पर

    G034 suraj chand sitare

    सूरज चाँद सितारे तुम्हारे हो जाएंगे

    जिस दिन आप हमारे हो जाएंगे

    G037 Tumhe hamse pyaar

    तुम्हें हमसे प्यार हो न हो हमें तो है

    तुम्हें इन्तज़ार हो न हो हमें तो है

    G022 Aaj fir hamse

    आज फिर हमसे परदादारी है

    इतना ज़ुल्म क़्या ख़ता हमारी है

    G019 Tere kadmo mai

    तेरे क़दमों में मेरा सर होगा

    कहाँ ऐसा मेरा मुक़द्दर होगा

    G041 Shaam aye safar

    चाँद से सूरज से जिससे भी यारी रखिए

    बस इस दिल में थोड़ी जगह हमारी रखिए

    G018 Hamne ek Shaam

    हमने इक शाम सुर्ख फूलों से सजायी है

    और तुमने ना आने की कसम खायी है

    G041 Shaam aye safar

    शाम-ए-सफर में गर हमनशी का साया भी हो
    ज़िन्दगी यूं ही सफ़र में गुज़ार दूं मैं

    K041 Oh meri maa
    ओह मेरी माँ

    ओह मेरी माँ,
    तू चली गई है कहाँ,
    छोड़ गई क्यों अकेला,
    इस जलते जहाँ।

    G031 Dil mai tere

    दिल में तेरे बता क्या है
    हमसे हुई खता क्या है

    G001 Zindagi aram ka samaan

    ज़िन्दगी आराम का सामान बन के रह गयी

    आरज़ू इक घर की थी मकान बन के रह गयी

    G008 Bahut hai duniya mai

    बहुत है दुनियां मे लोग, दर्द बढ़ाने वाले
    हमसे कहां मिलेंगे, मरहम लगाने वाले

    G017 Kuch gum nahi

    कुछ गम नहीं जो मौत, गले लगा ले
    गर इक घड़ी भी तू मुझें,अपना बना ले

    G006 Bekhayali mai barha

    बेख्याली में बरहा वो ये भूल जाते हैं
    नशेमन हो शबाब तो रिंदे लूट जाते है

    G015 Na zafa mai tadpe

    ना ज़फा में तड़पे ना वफ़ा में मुस्कुराए

    ऐसी भी ज़िन्दगी क्या ज़िन्दगी कहलाए

    G007 Kyun tum mujhmai

    क्यों तुम मुझ में अपना, ख़ुदा ढूढ़ते हो
    आप भी न जाने ये, क्या ढूढ़ते हो

    G005 Jiska gum hai

    जिसका गम हैं बस वही जाने
    दूसरा और कोई क्या जाने

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    बेखयाली में बरहा
    बेख्याँली में वो अक्सर भूल जाते हैं
    नशेमन हो शबाब तो रिंदे लूट जाते हैं
    जिसका गम है
    जिसका गम हैं बस वही जाने
    दूसरा और कोई क्या जाने 
    ये भी क्या बात हुई
    यें भी क्या बात हुई, की वो बात नहीं करते 
    पहले जैसी हमसे वो, मुलाक़ात नहीं करते 

    कविता

    ज़िन्दगी

    ज़िन्दगी तू क्यूँ रेत बन गयी

    मैं जब-जब तुझे

    बेटी की पुकार

    क्यूँ हिला देते हो
    मेरी अंतरात्मा को झिंझोड़कर

    आत्मसाक्षात्कार

    यह तो विदित है
    कि मैं किशोरी नहीं

    इमेज शायरी

    रीसेंट/पॉपुलर

    ज़िन्दगी आराम का सामान

    ज़िन्दगी आराम का सामान बन के रह गयी

    आरज़ू इक घर की थी मकान बन के रह गयी

    हर आदमी अकेला

    हर आदमी अकेला परेशान बहुत है

    इस शहर में दोस्त कम अंजान बहुत है

    सहरा में मीराज़ दिखाकर

    सहरा में मीराज़ दिखाकर मुझे भटकाने वाले

    तुम्हींतो थे मेरे रहबर मुझे राह दिखाने वाले

    NAZAM KA TAB HAI YE

    KAVITA KA TAB HAI YE