आज क्यूँ न कुछ यू किया जाए
तेरी यादों के साये तले सोया जाए
घर को अपने फूलों से सजाया जाए
खुशबुओ को साँसो मे बसाया जाए
घरोंदा अपना प्यार से बनाया जाए
हर तिनका शिद्दत से सजाया जाए
जश्न-ए-उल्फत को यूँ मनाया जाए
मेला खुशियों का दिल से लगाया जाए
महफ़िल को यूं रंगीन बनाया जाए
साज-ए-उल्फ़त ही बजाया जाए
अनबुझी प्यास को यूं बुझाया जाए
जाम-एँ-मोहब्बत ही पिलाया जाए
दोस्ती को कुछ ऐसे निभाया जाए
दिल खोल के यार क़ो दिखाया जाए
दूरीयों को ऐसे खत्म किया जाए
प्यार दिया जाए प्यार लिया जाए
जश्न-ए-मोहब्बत हो रोशन सभी पर
चिराग़-ए-वफ़ा दिल से जलाया जाए
मुस्कराऐं जब भी उनको याद किया जाए
ये वादा ख़ुद से ‘राजा’ आज किया जाए
G046
