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    G041 Shaam aye safar

    हर चमन में इश्क़-ए-गुल कहाँ खिलता है

    जहाँ उम्मीद हो इसकी कहाँ मिलता है

    G019 Tere kadmo mai

    तेरे क़दमों में मेरा सर होगा

    कहाँ ऐसा मेरा मुक़द्दर होगा

    G041 Shaam aye safar

    चाँद से सूरज से जिससे भी यारी रखिए

    बस इस दिल में थोड़ी जगह हमारी रखिए

    G018 Hamne ek Shaam

    हमने इक शाम सुर्ख फूलों से सजायी है

    और तुमने ना आने की कसम खायी है

    G041 Shaam aye safar

    शाम-ए-सफर में गर हमनशी का साया भी हो
    ज़िन्दगी यूं ही सफ़र में गुज़ार दूं मैं

    K041 Oh meri maa
    ओह मेरी माँ

    ओह मेरी माँ,
    तू चली गई है कहाँ,
    छोड़ गई क्यों अकेला,
    इस जलते जहाँ।

    G031 Dil mai tere

    दिल में तेरे बता क्या है
    हमसे हुई खता क्या है

    G001 Zindagi aram ka samaan

    ज़िन्दगी आराम का सामान बन के रह गयी

    आरज़ू इक घर की थी मकान बन के रह गयी

    G008 Bahut hai duniya mai

    बहुत है दुनियां मे लोग, दर्द बढ़ाने वाले
    हमसे कहां मिलेंगे, मरहम लगाने वाले

    G017 Kuch gum nahi

    कुछ गम नहीं जो मौत, गले लगा ले
    गर इक घड़ी भी तू मुझें,अपना बना ले

    G006 Bekhayali mai barha

    बेख्याली में बरहा वो ये भूल जाते हैं
    नशेमन हो शबाब तो रिंदे लूट जाते है

    G015 Na zafa mai tadpe

    ना ज़फा में तड़पे ना वफ़ा में मुस्कुराए

    ऐसी भी ज़िन्दगी क्या ज़िन्दगी कहलाए

    G007 Kyun tum mujhmai

    क्यों तुम मुझ में अपना, ख़ुदा ढूढ़ते हो
    आप भी न जाने ये, क्या ढूढ़ते हो

    G005 Jiska gum hai

    जिसका गम हैं बस वही जाने
    दूसरा और कोई क्या जाने

    G002 Har admi akela

    हर आदमी अकेला, परेशान बहुत हैं
    इस शहर में दोस्त कम, अनजान बहुत हैं

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    बेखयाली में बरहा
    बेख्याँली में वो अक्सर भूल जाते हैं
    नशेमन हो शबाब तो रिंदे लूट जाते हैं
    जिसका गम है
    जिसका गम हैं बस वही जाने
    दूसरा और कोई क्या जाने 
    ये भी क्या बात हुई
    यें भी क्या बात हुई, की वो बात नहीं करते 
    पहले जैसी हमसे वो, मुलाक़ात नहीं करते 

    कविता

    ज़िन्दगी

    ज़िन्दगी तू क्यूँ रेत बन गयी

    मैं जब-जब तुझे

    बेटी की पुकार

    क्यूँ हिला देते हो
    मेरी अंतरात्मा को झिंझोड़कर

    आत्मसाक्षात्कार

    यह तो विदित है
    कि मैं किशोरी नहीं

    इमेज शायरी

    रीसेंट/पॉपुलर

    ज़िन्दगी आराम का सामान

    ज़िन्दगी आराम का सामान बन के रह गयी

    आरज़ू इक घर की थी मकान बन के रह गयी

    हर आदमी अकेला

    हर आदमी अकेला परेशान बहुत है

    इस शहर में दोस्त कम अंजान बहुत है

    सहरा में मीराज़ दिखाकर

    सहरा में मीराज़ दिखाकर मुझे भटकाने वाले

    तुम्हींतो थे मेरे रहबर मुझे राह दिखाने वाले

    NAZAM KA TAB HAI YE

    KAVITA KA TAB HAI YE