किश्ती मेरी और कितना मझधार में ले जाओगे
डूब गया गर मैं तो तुम भी डूब जाओगे
मैं कतरा ही सही मेरा भी वज़ूद है
मैं ना हूं तो समंदर को तरस जाओगे
रात अभी बाकी हैं घूम लो आवारा
सुबह तो तुम लौट के घर ही आओगे
ढूँढोगे जब भी मुझे दिल की नज़रो से
हर तरफ दिखूँगा जिधर नज़र घुमाओगे
मैं आज हूँ थाम लो मुझे बाहों में
गुज़र गया कल तो ढूँढते रह जाओगे
जलेगा उम्मीद-ए-चिराग मेरे लहू से
हर लौ में दिखूँगा जो शमा जलाओगे
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