अपने चेहरे को गर दिल का आईना बनाइए
लोगों के पत्थरों से बचकर दिखाइए
दर्द जितने भी हों दिल में मुस्कुराते रहिए
गर रो पड़े तो ज़रा सँभलकर दिखाइए
किसी को बदलने की कोशिश ना कर ऐ दोस्त
पहले अपनी फ़ितरत तो बदल कर दिखाइए
ज़ख्म जितने भी मिले बस छुपाए रखिए
ज़ख्मो की सरे-आम ना नुमाइश लगाइए
दर्द की नुमाइश मे सुकूं मत ढूंढ
दर्द को हर लम्हा ‘राजा’ पी कर दिखाइए
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