Posted inGhazal/Nazm काश! मैं भी Posted by Bhuppi Raja February 17, 2001No Comments काश! मैं भी काश! मैं भी ऐसा होता,कह देता जो मन जैसा होता। इतनी हिम्मत मुझमें होती,मैं भी तेरे जैसा होता। मुख मेरा भी उज्ज्वल होता,गर मन शीशे जैसा होता। पल-पल यूँ न सोचा करता,ऐसा होता तो कैसा होता। सब खुश रहते, कोई न रोता,गर न पैसा–पैसा होता। जो भी होता, उल्टा होता,कुछ तो मेरे जैसा होता। ये जग सारा मेरा होता,गर न ऐसा–वैसा होता। तू क्यों चिंता करे है ‘राजा’,जो रब चाहे वैसा होता।G053 Post navigation Previous Post ना कोई आँखNext Postअपने चेहरे को