काश! मैं भी ऐसा होता,
कह देता जो मन जैसा होता।
इतनी हिम्मत मुझमें होती,
मैं भी तेरे जैसा होता।
मुख मेरा भी उज्ज्वल होता,
गर मन शीशे जैसा होता।
पल-पल यूँ न सोचा करता,
ऐसा होता तो कैसा होता।
सब खुश रहते, कोई न रोता,
गर न पैसा–पैसा होता।
जो भी होता, उल्टा होता,
कुछ तो मेरे जैसा होता।
ये जग सारा मेरा होता,
गर न ऐसा–वैसा होता।
तू क्यों चिंता करे है ‘राजा’,
जो रब चाहे वैसा होता।
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