Posted inGhazal/Nazm आँखों में सेहरा Posted by Bhuppi Raja February 14, 2001No Comments आँखों में सेहरा आँखों में सेहरा लिए समंदर ढूँढते हैंहौसले हमारे देखिये बवंडर ढूँढते हैं लड़ जाये जो तूफ़ानों से सीना तानेअपने अन्दर वो सिकन्दर ढूँढते हैं हमसे आँख मिलाने का जो हौसला रखेज़माने में ऐसा कोई धुरन्धर ढूँढते है जिसे ना ढूँढ पाया कोई आज तकज़िद्द हमारी है कि मुक़द्दर ढूँढते है जंगल में तो जंगल का ही कानून चलेगातुम रहो यहां सलामत हम शहर ढूँढते है हम चले पहाड़ों पे कुछ छुट्टियाँ मनानेतुम तपो जून में ह9म सितम्बर ढूँढते है इसे मैं क्या समझूँ, दोस्ती या दुश्मनीदुआ होंठों पे है और ख़न्जर ढूँढते हैं गुज़री है ताउम्र बेमतलब की बातों मेंजन्नत संवारनी है कलन्दर ढूँढते है तुम्हें भी मिल ही जाएगा तुम्हारा ख़ुदसब को मिलेगा जो रब अन्दर ढूँढते हैंG049 0 Post navigation Previous Post अभी हममें हिम्मतNext Postजिंदगी मेरी रब की