बहुत चोट खाये हो क्यों बताते नहीं
सब दिल में छुपा रखा है, दिखाते नहीं
मुस्कुरा तो रहे हो मगर आँखें नम हैं
क्यों हाल-ए-दिल किसी को सुनाते नहीं
दर्द का रिश्ता है, कुछ तो कह दो
चुप रहकर किसी को सताते नहीं
चोट खाई है, दर्द तो होगा ही
क्यों रहबर को अपने बुलाते नहीं
ग़म है तो खुशियाँ भी आ जाएँगी
क्यों अपने दिल समझाते नहीं
दर्द है तो दवा भी मिल जाएगी
क्यों जाम होंठों से अपने लगाते नहीं
हवा भी आएगी, खिड़कियाँ तो खोलो
बदले मौसम से यूँ घबराते नहीं
पूरे होंगे सब ख्वाब, उठो तो सही
यूँ अरमानों को अपने दबाते नहीं
उजालों से तुम कब तक छुपोगे
अंधेरे है, क्यों शमा जलाते नहीं
माज़ी में डूबकर आँसू मत बहाओ
बुरा सपना समझ क्यों भुलाते नहीं
हिम्मत दिखाओ ‘राजा’ कदम बढ़ाओ
ज़िन्दगी हँसी है क्यों गले लगाते नहीं
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