हाले दिल

हाले दिल

हाले दिल कुछ उन्हें यूँ सुनाया गया

अपने दिल को किताब बनाया गया

 

इज़हार-ए-उल्फ़त यूँ हमने किया

हर सफ़े में गुलाब सजाया गया

 

रोशनारा महफ़िल यूँ हमने किया

जिगर-ए-लहू से चिराग़ जलाया गया

 

ख़यालों से मेरे जब वो गुज़रा किए

बे-ख़ुदी में भी मुस्कुराया गया

 

जब मिलने की ज़िद की दिल ने मेरे

बामुश्किल उसे समझाया गया

 

जब भी उनकी यादों का आना हुआ

हर तरफ़ उनकी महक को पाया गया

 

मनाने से मेरे वो मुस्कुराने लगे

जब भी रूठे शिद्दत से मनाया गया

 

दास्तां मेरी सुनते ही वो रो दिए

हमसे और न हाल-ए-दिल सुनाया गया

 

बे-ख़ुदी का मेरे राज़ वो जान गए

जाम-ए-इश्क़ जब लबो से लगाया गया

 

यूँ किया हमने अपने दिल पे सितम

दर्द-ए-दिल जब उनसे लगाया गया

 

उसने पूछा ‘राजा’ तेरे दिल में क्या है

दिल-ए-आईना यारा को दिखाया गया

G036

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *