Posted inGhazal/Nazm तू अपार Posted by Bhuppi Raja April 7, 2026No Comments तू अपार तू अपार, अपरंपार है,तेरी रहमतें हज़ार हैं। तुझसे और मैं क्या माँगूं,तेरी कृपा मुझपे अपार है। मेरी झोली छोटी पड़ गई,तूने दिए मुझे बेशुमार हैं। तू सबको दे दाना-पानी,तुझे सबका बड़ा ख़याल है। अज्ञानी, नासमझ हूँ मैं,और तू ज्ञान का भंडार है। गर साँसों में तू न हो मेरे,तो जीवन मेरा बेकार है। तेरा ध्यान ही मेरी साधना,तेरा नाम ही मेरा आधार है। तू शाश्वत है, तू ही सत्य,बाकी जग तो माया-जाल है। हर शै में तू ही दिखे मुझे,बाकी सब तो बेकार है। तू ही रास्ता, तू ही मंज़िल मेरी,दिल मिलने को बेताब है। शुकराना मैं दिल से करूँ,तेरा दिल से शुक्रगुज़ार है।G077 Post navigation Previous Post ओह मेरी माँ